एक खूबसूरत लड़की का, खूबसूरत सवाल ?

सागर इंडिया

पढ़ना_कितना_जरूरी_है, शायद नौकरी के लिए या यह भी हो सकता है, नॉलेज के लिए, हां भाई थोड़े ज्ञानवान बनने के लिए भी पर बहुत जरूरी है, कि आप पढ़े लिखे हो आज के समाज में, पर कभी सोचा है? आसान नहीं होता, पढ़ना कुछ भी, कहानी, कविता, शायरी, अखबार, किताब, या चेहरा किसी का, कोई भी सब्जेक्ट या कोई भी कोर्स टेंथ, ट्वेल्थ, ग्रेजुएशन या मास्टर डिग्री या फिर कोई डिप्लोमा कोर्स या फिर वोकेशनल कोर्स यानी कुल मिलाकर पीएचडी कर ले आप, फिर भी पढ़ना जरूरी है l

क्योंकि पढ़ता हुआ व्यक्ति, सीखते रहता है, और सीखता हुआ व्यक्ति हमेशा जीवन को नए सिरे से जीता है, पर लोगों ने आजकल पढ़ना बंद कर दिया है l

मैं आपको सच्ची घटना बताता हूं, मैं मूल रूप से नवादा जिले के गांव, रानीहट्टी का रहने वाला हूं, पटना मेरी कर्म भूमि है, “पटना विश्वविद्यालय” से पढ़ाई चल रही है मेरी अभी, मूलतः अभिनेता हूं मैं, लेकिन मुझे कविता, कहानी, पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, अक्सर समय अभाव के कारण, बहुत सारी चुनी हुई, पढ़ने की लिस्ट में शामिल किताबों को पढ़ नहीं पाता हूं, तो अक्सर मेरा गांव जाना लगा रहता है, नवादा टू पटना, महीने में लगभग 5 बार कर ही लेता हूं आना जाना पटना से, मेरे गांव की दूरी 127 किलोमीटर है, तो मैं जाने और आते वक्त में, बस के सफर का भरपूर फायदा उठाते हुए, अपने साथ किताबे रख लेता हूं, जिन किताबों को मुझे पढ़ना होता है l

लगभग 4 घंटे लगते हैं मुझे जाने में और उन 4 घंटों में मैं, अपनी किताबें पूरी करता हूं पढ़कर, कई किताब की कहानियों को मैंने बस के सफर में ही खत्म किया, शानदार अनुभव होता है, आप भी करके देखिए आपको भी अच्छा लगेगा, मतलब सफर तो मुझे लगता ही नहीं बोझिल, क्योंकि साथ चल रही होती है कहानियां, सफर में जैसे-जैसे सफर मंजिल की ओर बढ़ता है, मेरी किताब की कहानियां खत्म होने की, कगार पर होती है l

पिछले हफ्ते मैं अपने पटना यूनिवर्सिटी के कॉलेज दरभंगा हाउस से परीक्षा देकर, वापस गांव जा रहा था, मैंने “वाणी” प्रकाशन से टोटल 7 किताबें खरीदी गांव जाने से पहले, 1230 रुपया किताबों के दाम है, और मैंने उन 7 किताबों में एक किताब को सफर में पढ़ने के लिए चुना, किताब का नाम “मुन्नी मोबाइल” , मेरी बस गांधी मैदान से खुली और बाईपास होते हुए अपने मंजिल की ओर, अपनी रफ्तार में दोगुनी रफ्तार के साथ भागने लगी, क्योंकि मैं बस के खुलने के समय से लेट पहुंचा था, तो मुझे सीट नहीं मिली, कंडक्टर ने भरोसा दिलाया की बाईपास के बाद आपको सीट मिल जाएगी और मैं ड्राइवर के बगल वाले खंबे को पकड़कर, बस में सफर कर रहा था, तभी भीड़ और बढ़ने लगी मुझे समझ आ गया था, कि पूरे रास्ते में सीट नहीं मिलेगा मुझे, तो इस को सच मानकर किताबें पढ़ना, शुरू करें यह दिमाग ने कह दिया मुझे, मैंने ना देरी करते हुए बैग से किताब निकाल ली, “मुन्नी मोबाइल” और पढ़ना शुरू किया, तभी बहुत देर खड़े पढ़ते देख कर मेरे जस्ट, आगे वाले सीट पर दो लड़के बैठे थे उसने मुझसे कहा भैया बैठ कर पढ़ लो, थोड़ी जगह है और उनके ठीक पीछे दो लड़कियां, सामने वाली सीट पर एक परिवार और उसके आगे वाली सीट, जो ड्राइवर के बगल में था, उस पर 3 महिलाएं और दो लड़के बैठे थे, बस में जो कि बीच रास्ते में, कुछ-कुछ लोकल सवारियों को बस वाले बैठा रहे थे, तो मुझे खंबे के सहारे किताब पढ़ने में दिक्कत हो रही थी, मैं भी तंग आ रहा था, बार-बार लोग आ रहे थे जा रहे थे, मैं खंबे के नीचे बस के सतह पर, बिल्कुल पालथी मारकर बैठ गया और अपने कपड़े कपड़े के गंदे होने की, चिंता छोड़ कर कहानी को मजे से पढ़ने का, इसे सुनहरा अवसर समझा! मैं कहानी पढ़ रहा था, लगातार पढ़े जा रहा था, तभी मेरा गला सूखने लगा, मैंने अपने बैग से पानी का बोतल निकालने के लिए, बैक के बगल में बैठे एक भाई साहब को बोला, क्योंकि थोड़ी दूरी थी मेरी बैग से तो, बॉटल निकालने में दिक्कत हो रही थी और भाई साहब को भी, तभी मेरे सामने बैठी लड़कियों ने, मुझसे कहा सर पानी पिएंगे क्या ? उनके आग्रह को मैंने स्वीकार करते हुए, उनके बॉटल से पानी का लगातार तीन चार घोट लगा लिया, चुकी अब मैं कहानी के सारे पात्रों से परिचित हो चुका था, तो कहानी पढ़ने में मजा आने लगा, यह मेरी आदतों में शुमार है कि मैं, आवाज के साथ पढ़ता हूं अक्सर कहानियों को, तो सामने बैठे लगभग सारे यात्री भी मेरे कहानियों के पात्रों से, परिचित हो चुके थे और वह भी कहानी को सुन रहे थे, मानो जैसे मैं कोई कथा वाचक हूं, खैर लगभग 2 घंटे बाद हमारी बस बिहार पहुंचने को थी, तभी सामने बैठी लड़कियों में से, एक लड़की ने मुझे बीच में टोका, कहानी पढ़ते हुए, सर प्लीज…

रुक जाइए, आप थक गए होंगे.. लगातार 2 घंटे से पढ़ रहे हैं,

कैसे पढ़ लेते हैं, इतनी देर आप किताबें ?…

थोड़ा आराम कर लीजिए, फिर आप अपनी कहानी पढ़िएगा!

मैं हैरान था, यह कैसा सवाल है, क्योंकि मेरा भी ध्यान अब, कहानी से कट चुका था, और उसका कारण था, उस लड़की का यह सवाल (?)
कैसे पढ़ लेते हैं, इतनी देर आप किताबें ?…

और उस लड़की के सवाल के जवाब में, वहां के यात्रियों ने भी जवाब देना शुरू किया और सब ने मेरा उत्साह बढ़ाया, हां भाई कैसे पढ़ लेते हो इतनी देर किताबें, मुझे लगा क्या मैं, सचमुच कुछ कमाल कर रहा हूं क्या, किताबे तो सब पढ़ते हैं, और मुझसे तो कई मोटी मोटी किताबें, खैर उस लड़की ने मुझसे मेरा परिचय लिया l

अनजान लड़की ने, मेरे भविष्य के ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ, मुझे अपनी सीट भी ऑफर कर दी, मैं बिहार उतर जाऊंगी सर, आप बैठ जाओ इस पर और लगभग 5 मिनट तक हम दोनों में बातचीत का दौर चला, जैसे क्या पढ़ती हो ? आप क्या करते हैं ? तुम कहां रहती हो ? हम फिर कब मिलेंगे सर ? आप बहुत अच्छा पढ़ते हैं, यही सब…..

उस लड़की के बातचीत के दौरान, अगल बगल के लड़के भी मुझ से बातचीत करने लगे, बगल वाली आंटी ने भी मुझसे संपर्क साधा, मेरा फोन नंबर तक ले लिया और मुझसे कुछ किताबों के बारे में पूछने लगी, साहित्य से भी उन्हें लगाव होगा शायद उन्हें मैं ऐसा सोच रहा था, तभी उन्होंने बताया कि वह, नवादा में ही कॉलेज में शिक्षिका है l

बिहार गाड़ी पहुंच चुकी थी___

इस प्यारी सी लड़की ने, प्यारी सी मुस्कान के साथ, मुझे अलविदा कहा, कुछ ही मिनटों में वह लड़की पीछे छूट चुकी थी, पर उसका सवाल अब भी मेरे साथ ही जवाब के इंतजार में खड़ा था, बहुत ही गहरा सवाल पूछा था उसने मुझसे, शायद इस सवाल का जवाब, कई वर्ष बाद देने में सक्षम हो पाऊंगा मैं l

अब मेरे सफर की साथी, वह शिक्षिका आंटी थी, हम लोग बहुत व्यवहारिक बातें करने लग गए थे, तभी उन्होंने बताया कि, मैंने आपको एक कवि सम्मेलन में सुना है नवादा में, तभी मुझे याद आया अरे हां मैंने तो आप ही के कॉलेज में कविता पाठ किया था लगभग 1 साल पहले, मुझे एक साहित्यिक व्यक्तित्व मिल चुका था, नवादा पहुंचते तक ढेर सारी बातचीत हुई, रात के लगभग 10:30 बजे बस नवादा पहुंच चुकी थी, आंटी को बाय बोलने के बाद, मैं अपने घर की ओर बढ़ चला, नवादा जिले से 10 किलोमीटर दूर है मेरा गांव..

मैं इस 10 किलोमीटर की दूरी में भी, उसी सवाल के जवाब को, खोजने की कोशिश कर रहा था….

पर मैं हर बार असफल रहा, कितना खूबसूरत सवाल था ना l

कैसे पढ़ लेते हैं, इतनी देर आप किताबें ?…

लेखक :- Sagar India (सुबह के दोपहर 2:00 बजे लिखी गई है)
तस्वीर :- Anant Kumar Shaswat

Author: Shashi Kumar Aansoo

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