पापा! तुम गए जबसे (कन्हैया)

तुम गए जबसे, कुछ पास नहीं मेरे,
कितने मौसम आये बदले..
आंखें बरसात है घेरे।।

थी तमन्ना ऊँगली थामुं…
जेब टोलूँ मैं।
चाट खा लूं ..डांट खा लूं…
बातें कर लूं दो…गोद में तेरे।।

पर ये मुमकिन हो सका ना,
यादें डाले हैं डेरे…..।

तुम गए जबसे,कुछ पास नहीं मेरे,
कितने मौसम आये बदले..
आंखें बरसात है घेरे..।।


✍🏻कन्हैया

चलो एक बार फिर गांव की ओर – नितेश कपूर

नितेश कपूर

चलो एक बार फिर गांव की ओर।
उस बड़े बरगद के छांव की ओर।।

जहां मिलती थी खुशियां राहों में।
थी जन्नत जहां बुजुर्गों के बाहों में।।

हर जगह अपनों का एहसास था ।
हर घर में जहां शांति का वास था ।।

ना नेटवर्क की पीड़ा ना प्रदूषण का डर ।
अपनों के बीच पतली पर लंबी डगर ।।

शहरों ने हमें बना दिया संकुचित घर ।
इमारतें हैं लंबी पर संबंधों में लटका अधर ।।

गांव की छोटी सी झोपड़ी रामराज है ।
शहर का अकेलापन संकुचित स्वराज है ।।

कोयल की कूक और कौवे की कांव की ओर ।
चलो एक बार फिर गांव की ओर।
उस बड़े बरगद के छांव की ओर।।

काव्य मञ्जरी की काव्य गोष्ठी में पल-पल बरसे हर रस, समसामयिक विषयों पर चिंतन-मंथन करते रहे कलमवीर

रविवार 12-06-2022 को साहित्यिक सांस्कृतिक कला मंच आँती के तत्वाधान में काव्य-मञ्जरी 0.2 ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया था। जिसमें अध्यक्ष Gautam Kumar सरगम भैया के अध्यक्षता में वरिष्ठ कवि एवं जाने-माने पत्रकार Rajesh Manjhwekar भैया, कवि डॉ शैलेन्द्र कुमार प्रसून जी, कवि शशि कुमार आँसू भैया, कवि एवं शिक्षक नितेश कपूर जी, कवि-गायक Santosh Maharaj जी, युवा कवि Amit Kumar Amit भाई एवं मैंने Prabhakar India काव्य पाठ किया।
राजेश मंझवेकर भैया ने अंत में बहुत सुंदर समीक्षा भी किये और कलम को और प्रखर बनाने हेतू सुंदर सुझाव भी दिए।


आप सभी ने मंच के लिए समय दिया, उसके लिए हम बहुत आभार व्यक्त करते हैं और आशा करते हैं कि #साहित्य सेवा निरन्तर होता रहे।


बहुत-बहुत धन्यवाद।
प्रभाकर प्रभू

सोनवर्षा वाणी समाचार पत्र
सन्मार्ग समाचार पत्र
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