पापा! तुम गए जबसे (कन्हैया)

तुम गए जबसे, कुछ पास नहीं मेरे,
कितने मौसम आये बदले..
आंखें बरसात है घेरे।।

थी तमन्ना ऊँगली थामुं…
जेब टोलूँ मैं।
चाट खा लूं ..डांट खा लूं…
बातें कर लूं दो…गोद में तेरे।।

पर ये मुमकिन हो सका ना,
यादें डाले हैं डेरे…..।

तुम गए जबसे,कुछ पास नहीं मेरे,
कितने मौसम आये बदले..
आंखें बरसात है घेरे..।।


✍🏻कन्हैया

Happy 2021 – इस साल आप ‘इक्कीस’ रहो

चलो ऐसा फिर कुछ यत्न करो,
इस साल आप ‘इक्कीस’ रहो

ना द्वेष रखो ना मनभेद करो,
निज लक्ष्य निरन्तर भेद करो

निज गौरव का उत्थान रहे
हम आपके हैं यह ध्यान रहे

कुछ आप कहो, कुछ मेरी सुनो,
इतना बस अधिकार बनाए रखो।

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