How Is Your Car Insurance Premium Calculated?

Well it’s about time that changed, don’t you think? Read on to know the components of your car insurance premium, so you can save more, and get smarter along the way!

There are a lot of things in the fine print of our insurance policies- the Terms and Conditions, the Exclusions, the Special Cases… but premium is always told to us up front. More often than not, however, we tend to hear just a number, never really understanding how that number was arrived at, or what the process of calculation truly entailed.

The premium of car insurance depends on the following factors:

3 Aspects of Car Insurance Premium

Your car insurance premium is the sum of the following 3 covers:

In India, it is mandatory to have a TPL cover if you own a car.

Third Party Liability (TPL) covers any damage to a person or property by your insured vehicle that results in financial loss or loss of life to the said person.

But TPL does not cover expenses borne by you for any repairs, so it’s always prudent to opt for a policy that covers losses caused by damage to your own vehicle as well.

The TPL premium depends on the car capacity and is issued by the Insurance Regulatory Authority of India (IRDAI).

The OD cover is optional but highly beneficial. It reimburses your expenditure in case your car is damaged due to any natural events such as earthquakes, fires, storms, etc. or due to an accident. The deal is – higher the Insurance Declared Value or IDV, higher the premium and vice versa. Thus, as your car grows older, the IDV decreases.

The premium for OD cover is calculated as a percentage of IDV as decided by the Indian Motor Tariff.

IDV = Showroom price of your car + cost of accessories (if any) – depreciation value as per (IRDAI)

Thus, formula to calculate OD premium amount is:

Own Damage premium = IDV X [Premium Rate (decided by insurer)] + [Add-Ons (eg. bonus coverage)] – [Discount & benefits (no claim bonus, theft discount, etc.)]

This component of your car insurance premium goes beyond your car, and safeguards you, not only against accidents, but mishaps leading to a disability. This is a vital part of being comprehensively protected, because the chances of disability are higher than almost any other outcome. In 2014, nearly 3 lakh people were killed in road accidents. But 5 lakh were either seriously injured or permanently disabled. You can also increase the sum insured to include unnamed passengers in the policy.

The premium for this cover goes higher as your sum insured increases.

And finally, you have riders. These riders, or car insurance add-ons, provide various kinds of protection and services to you at a nominal cost. For example, Engine Secure protects against damage caused by waterlogging, Road Side Assistance will send help if your car breaks down in the middle of the road, NCB Protection lets you make two claims without losing out on your No Claim Bonus, and more. Each rider helps to make your car insurance policy more robust to ensure you are protected in all situations.

IRDAI To Keep Third Party Motor Insurance Premiums Unchanged For All Vehicles In FY’21


  • IRDAI will not increase the premium rates of third party motor insurance.
  • The increase in premium rates would have had multiplier effect.
  • SIAM had requested IRDAI to not revise the premium rates.

At a time when the entire nation is fighting against the novel COVID-19 by remaining indoors and putting a stop at all non-essential outdoor operations, the economy and industries are bearing the brunt of it. The Society Of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) had already said that the auto industry is incurring a loss of Rs. 2300 crore per day of closure and trying that the situation doesn’t worsen further, SIAM had requested the Insurance Regulatory And Development Authority of India (IRDAI) to not revise the third party motor insurance charges for FY2021. The IRDAI has accepted the submission and will be retaining its premium rate for the financial year.

Rajan Wadhera, President, SIAM stated, “We are thankful to the Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) for keeping the Third Party Motor Insurance Premium Rates unchanged for all vehicle categories for the Financial Year 2020-21. This is in line with SIAM’s submission to IRDAI on retaining premium rates and, thereby, avoiding an increase in the cost of vehicle acquisition for end consumers.”

How To Renew Your Car Insurance – Know the Basic Facts of General Insurance : (आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस रिनूअल)

आपकी गाड़ी का इन्सुरंस सही समय पर रिनूअल हो ये मोटर व्हीकल एक्ट के तहत आपकी कानूनी व अहम् जिम्मेदारी है ख्याल रहे मोटर इंश्योरेंस एक्ट के अनुसार भारत में थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस अनिवार्य है।
कभी-कभी हम जानकारी के अभाव में या गलत जानकारी के वज़ह से अपनी गाड़ियों की बीमा में टालमटोली कर बैठते है और बड़े जोखिम को वेवज़ह न्योता दे बैठते हैं । लोग इन्श्योरेन्स न होने की भयावहता से शायद परिचित नहीं होते है याद रहे इन्श्योरेन्स हमे कोई खुशी प्रदान तो नहीं करती पर पर पर इसकी अनुपस्थिति हमारी खुशियों पर ग्रहण जरूर लगा जाती है। हम कुछ पैसे बचाने के चक्कर मे अपनी खूद की गाड़ियों का इंश्योरेंस नहीं करके अपना हीं नुकसान कर बैठते हैं।

आज सभी प्रमुख इंश्योरेंस कंपनी हर जगह प्रमुखता से से उपलब्ध है। आप आपकी कार के इन्श्योरेन्स का तुलनात्मक अध्ययन व उसके सभी उपलब्ध सुविधाओं के बारे मे रिनूअल के पहले सटीक जानकारी ले सकते हैं। आज ज्यादातर जनरल इन्श्योरेन्स कंपनी अपने रिनूअल के लिए सारे ऑनलाइन पेमेंट का विकल्प देती है और साथ मे आपका एजेंट भी आपंकों एस काम मे मदद करते है।

आजकल के डिजिटल वर्ल्ड मे जानकारी प्राप्त करना बेहद आसान है बस जरूरत है की आप सब्जेक्ट मैटर को बेहतर ढंग से समझे इसलिए यदि आपके कार इन्श्योरेन्स का रिनूअल नजदीक है, तो चलिए कुछ ध्यान रखने वाली कुछ बेहद इम्पोर्टेन्ट टर्म्स को जान लेते हैं ….

. सही इंश्योरेंस कंपनी का चुनाव (Select the Correct Insurance Company) : अगर आपकी वर्तमान इन्सुरंस कंपनी आपको सही सुविधा नहीं दे रही तो रिन्यूअल के वक्त आप नए इंश्योरेंस कंपनी में अपनी कार का इन्सुरंस रिन्यूअल करवा सकते हैं पर ख्याल रहे कम प्रीमियम के चक्कर में आप गलत सिलेक्शन न कर बैठे। आप सही कंपनी के चुनाव करते वक्त यह सुनिश्चित कर ले की उक्त कंपनी की सर्विस आपके शहर में या उसके आस पास के शहरों में उपलब्ध है या नहीं ! ऐसा न हो की जरुरत पड़ने परआपको मदद हीं न कर सकें. आप उसकी लोकल ब्रांच की उपलब्धता जरूर देख लें ।

२. इंश्योरेंस के प्रकार की सही जानकारी (Find The Correct Insurance Coverage Type): आप एक बार सही इन्श्योरेन्स कंपनी की तलाश अगर पूरी कर लेते हैं तो अप अपनी कार के लिए सही कवरेज के बारे में जानकारी का पता लगायें. आपके कौन-कौन सी कवरेज की आवश्यकता है और उनकी बेस्ट कीमत कितनी है, इसका पता लगाएं।  आप आपने एजेंट से अपनी रिन्यूअल नोटिस की मांग करें और दिए गए कवरेज को समझे या आपने एजेंट की सहायता लें। आप कंपनी के कस्टमर केयर को कॉल करके भी आपकी रिनूअल में दिए गए कवरेज की जानकारी ले सकते हैं। ऐसे प्रचलित रूप से हमारे इंडिया मे मोटर इंश्योरेंस मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं…

  • कंप्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी(Comprehensive Insurance ):

    यह एक प्रकार की नियमित मोटर पॉलिसी होती है। इसका दायरा भी बड़ा होता है। इसके तहत इंश्योरेंस कंपनी फर्स्ट पार्टी यानी आपका एवं थर्ड पार्टी अर्थात आपके अलावा अन्य किसी का दुर्घटना में हुए जान माल का नुकसान का खर्च की भरपाई करती है। बोलचाल की भाषा में इसे फुल पार्टी इन्सुरंस भी कहते  हैं।
  • थर्ड पार्टी इन्श्योरेन्स पॉलिसी (Third Party Insurance):

    थर्ड पार्टी इन्श्योरेन्स कानूनन अनिवार्य होता है। थर्ड पार्टी इंश्योरेंस को समझने के पहले हमें यह जान लेना चाहिए कि “थर्ड पार्टी” क्या होता है…

दरअसल मोटर इंश्योरेंस के संबंध में तीन पक्ष (Parties) होते हैं —  

  1.  First Party (प्रथम पक्ष): वह पक्ष (व्यक्ति या संस्था) जो कि जो बीमा खरीदता है वह First Party (प्रथम पक्ष) होता है। बीमा के संबंध में बीमा ग्राहक को प्रथम पक्ष माना गया है।
  2. Second Party (द्वितीय पक्ष): वह पक्ष, जो कि बीमा पॉलिसी बेचता है वह Second Party (द्वितीय पक्ष) होती है। बीमा के संबंध में बीमा कंपनी को द्वितीय पक्ष माना गया है।
  3. Third Party (तृतीय पक्ष): बीमा ग्राहक और बीमा कंपनी के अलावा कोई अन्य व्यक्ति या संपत्ति जो कभी भी किसी वाहन दुर्घटना के चपेट में आ सकता है उसे इन्श्योरेन्स के संबंध में थर्ड पार्टी कहा जाता है अर्थात Third Party (तृतीय पक्ष) वह है जिसे कभी आपके वाहन की टक्कर से नुकसान पहुंच सकता है।  

    थर्ड पार्टी इंश्योरेंस ऐसी बीमा पॉलिसी होती है, जिसका फायदा न तो बीमा करवाने वाले इन्शुर्ड (प्रथम पक्ष=First Party) को होता है और न ही बीमा करने वाली कंपनी (द्वितीय पक्ष=Second Party) को होता है बल्कि इस बीमा का फायदा, अलग किसी अन्य क्षतिग्रस्त होने वाले व्यक्ति Third Party या सामान को होता है। सिर्फ उस अन्य व्यक्ति या संपत्ति को हर्जाना मिलेगा, जिसे आपके वाहन से नुकसान पहुंचा है। इसमें आपको या आपके वाहन को हुए नुकसान का कोई क्लेम नहीं मिलेगा।
  • Standalone OD/ SAOD Insurance (स्टैंड अलोन ओ डी रिन्यूअल ): सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अगर आप नये दोपहिया वाहन खरीदते है तो पाँच साल का और प्राइवेट कार खरदते हैं तो तीन साल का थर्ड पार्टी इन्श्योरेन्स अनिवार्य रूप से करना पड़ेगा । इसी लिए IRDAI ने 1 सितंबर 2018 से नई व पुरानी कारों और दोपहिया वाहनों के लिए नई इन्श्योरेन्स पॉलिसी स्टैंडअलोन ओडी कवर की की व्यवस्था की है। अगर आप दोपहिया गाड़ी खरीदते है तो अक्सर आपकी इन्श्योरेन्स 1+5 टर्म (1 Year OD + 5 Years TP Cover) की मिलती है जहाँ एक साल कंप्रिहेंसिव कवर और बाकी अगला चार साल थर्ड पार्टी कवर हीं होता है, वही अगर आप कार खरीदते हैं तो वह १+३ टर्म (1 Year OD + 3 Years TP Cover) की होती है इसका सीधा मतलब एक साल कंप्रिहेंसिव कवर और बाकी अगला दो साल सिर्फ थर्ड पार्टी कवर हीं होता है । जब आपकी गाड़ी का एक साल पुरानी होती है तो आपके गाड़ी के OD कवर का रिनूअल इसी स्टैंड अलोन ओडी रिन्यूअल के तहत होता है ताकि आपकी गाड़ी का कंप्रिहेंसिव रिस्क चालू रहे .
    आजकल सभी इन्श्योरेन्स कंपनी प्रमुखता से स्टैंडअलोन ओडी इंश्योरेंस कवरेज प्रदान करती है।

3 .सही ऐड ऑन प्लान का चुनाव (Select The Correct Add-On Plan): आपकी कार का बेसिक कंप्रिहेंसिव इन्श्योरेन्स कवरेज मे बहुत सारे कन्डिशन होते हैं जिसके कारण दुर्घटना के बाद पूरा हर्जाना या क्लेम नहीं मिल पता पता है अतः सही ऐड-ऑन कवर का चुनाव अतिअवाश्यक है. जैसा कि नाम बताता है, यह आपके  नियमित मोटर पॉलिसी के दायित्व के अतिरिक्त, कुछ ऐड ऑन रिस्क कवर करती है जिसे कुछ अतिरिक्त राशि का भुगतान करके प्राप्त किया जा सकता है। आज हरएक इंश्योरेंस कंपनी आपके मूल मोटर बीमा पॉलिसी के साथ कई वैकल्पिक एड-आँन कवर दे रही है। यदि सही कवर चुना जाता है तो ये मनीसेवर्स हैं। ऐड-ऑन एक बेसिक कार इंश्योरेंस पॉलिसी का दायरा भी बढ़ाते हैं।

कुछ प्रचलित ऐड-ऑन कवर इस प्रकार हैं….(Following are Some Popular Add-on Coverage Options…

  • ज़ीरो डेप्रीसियेशन कवर (Zero/Nil Depreciation Reimbursement Cover):  आपकी गाड़ी में एक्सीडेंट के वज़ह से या अन्य किसी कारन से  किसी भी तरह का नुकसान पहुचता है तो इन्श्योरेन्स कंपनी क्लेम के बाद बदले गए पार्ट्स की कीमत का पूरा भुगतान नहीं करती बल्कि एक निश्चित प्रतिशत की राशि काट कर क्लेम का भुगतान करती है।  उसी काटे गए रकम को क्लेम डेप्रीसियेशन (मूल्यह्रास) कहते हैं जैसे सभी प्रकार के रबर/नायलॉन/प्लास्टिक पार्ट्स, टायर और ट्यूब, बैटरी और एयर बैग के लिए-50% और फाइबर ग्लास के लिए – 30% डेप्रीसियेशन होता है.  मेटल और लकड़ी के पार्ट के लिए उसके उम्र के अनुसार क्लेम अमाउन्ट मे से डेप्रीसियेशन किया जाता है जो की पहले 5% से 50% तक जाता है. यदि आप ज़ीरो डेप्रीसियेशन कवर / निल डेप्रीसियेशन का विकल्प चुनते हैं, तो नुकसान के मामले में इन्श्योरेन्स कंपनी आपके क्लेम के वक्त किसी भी तरह की कटौती/डेप्रीसियेशन नहीं करती है।
  • इंजन सिक्योर (Engine Secure Cover): इंजन में पानी के प्रवेश के कारन या इंजन से लुब्रिकेंट के रिसाव के कारन आपकी गाड़ी के इंजन, गियर बॉक्स या ट्रांसमिशन असेंबली में किसी भी प्रकार की क्षति पहुचती है तो इंजन सिक्योर कवर हीं इंजन और गियर बॉक्स के आंतरिक भागों के नुकसान की मरम्मत या रिप्लेसमेंट के खर्चों को कवर करती है।
  • रिटर्न टू इन्वाइस (Return to Invoice Cover): अगर आपकी गाड़ी चोरी हो जाती है या एक्सीडेंट के बाद टोटल लॉस केटेगरी मे आती है तो इन्श्योरेन्स कंपनी सिर्फ आपको आपकी गाड़ी के  IDV (सम इन्शुर्ड वैल्यू) या करंट रिप्लेसमेंट वैल्यू का क्लेम पेमेंट करती है पर अगर आप रिटर्न टू इन्वाइस ऐड ऑन कवर का विकल्प चुनते है तो ऐसी परिस्थिति आपको आपकी गाड़ी के IDV (सम इन्शुर्ड वैल्यू) के जगह गाड़ी की इन्वाइस वैल्यू (खरीदने व्यक्त की कीमत) का भुगतान करती है. इसके साथ-साथ  फर्स्ट टाइम रजिस्ट्रेशन चार्ज और रोड टैक्स का भी का भुगतान करती है. आप चंद और पैसे लगाकर नयी गाड़ी ख़रीद सकते है।
  • कंज़्यूमेबल्स कवर (Consumables Expenses Cover) : आपकी गाड़ी मे क्लेम के बाद नुकसान की मरम्मत या रिप्लेसमेंट के दौराननट बोल्ट, कूलेंट, इंजन ऑइल, ब्रेक ऑइल, बेयरिंग, ग्रीस, कन्डिशनर गैस आदि जैसी कंज्यूमेबल्स आइटम की कीमत कार इंश्योरेंस में कवर नहीं होती है हाँ अगर आप ‘कंज्यूमेबल्स कवर ऐड-ऑन’ का विकल्प लेते हैं, तो आपको कंज्यूमेबल्स आइटम मे किए गए खर्च का मुआवजा मिल सकता है।
  • की रिप्लेसमेंट कवर (Key Replacement Cover) : अगर आपकी गाड़ी की चाभीखो जाती है या चोरी हो जाती है या चाभी आपकी गाड़ी में ही टूट जाती है तो यह की (चाबी) रिप्लेसमेंट कवर हीं उसे मरम्मत या बदले जाने की खर्च को कवर करती है. अमूमन यह बेसिक इन्श्योरेन्स पॉलिसी मे कवर नहीं होता है। इस कवर को प्राप्त करने के लिए पुलिस शिकायत अनिवार्य है।
  • टायर सिक्योर कवर (Tyre Secure Cover) : आपकी नॉर्मल इन्श्योरेन्स पॉलिसी सिर्फ टायर या ट्यूब मे हुए नुकसान को कवर नहीं करती है।  जब एक्सीडेंट के वजह से आपकी गाड़ी को तो कोई नुकसान नहीं होता पर टायरों और ट्यूबों को नुकसान पहुँचता है जैसे बबल, पंचर, बर्स्ट या कट जाना या क्षति होना तब टायर सिक्योर कवर उसे रिप्लेसमेंट करने या उसे मरम्मत किए जाने वाले खर्चों को कुछ शर्तों के साथ कवर करती है।

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